कोटी बनाल में आयोजित दो दिवसीय रथ देवता ठाकुर साहब का दो दिवसीय घड्याला संपन्न, बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त

बड़कोट : कोटी बनाल में आयोजित दो दिवसीय रथ देवता ठाकुर साहब का दो दिवसीय जागरण (घड्याला) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। रथ देवता के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में दूर-दूर से भक्त पहुंचे। जागरण प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि पर्व के दो दिन बाद रात के समय होता है और अगले दिन रथ देवता के जागरण का समापन होता है।

उत्तराखंड की लोक संस्कृति और आस्था में रथ देवता (जिन्हें ठाकुर साहब या ठाकुर महाराज के नाम से भी जाना जाता है) का विशेष स्थान है। ये लोक देवता मुख्य रूप से उन दिवंगत आत्माओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्होंने जीवनकाल में जनकल्याण के कार्य किए, ईमानदारी और न्याय के प्रतीक बने, या असमय मृत्यु के बाद चमत्कारों से लोकप्रिय हुए। ऐसे व्यक्तियों को मृत्यु के बाद रथ देवता के रूप में पूजा जाता है, और उनकी पूजा में जागरण, घड्याला (रात्रि जागरण), रथ देवता अवतरण के साथ ही पांडव नृत्य का विशेष महत्व होता है।

कोटी बनाल (उत्तरकाशी जिले की बनाल पट्टी में स्थित कोटी गांव) के रथ देवता ठाकुर साहब का वास्तविक नाम दलेब सिंह रावत था। वे बनाल पट्टी के कोटी गांव के एक सम्मानित व्यक्ति थे, जिनकी ईमानदारी, न्यायप्रियता और जनसेवा के कारण मृत्यु के बाद उन्हें लोक देवता का दर्जा मिला।

स्थानीय कथाओं और परंपराओं के अनुसार, ठाकुर महाराज ने जीवन में सदाचार और समाज की भलाई के लिए जो कार्य किए, वे आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं। उनकी पूजा मुख्य रूप से बनाल क्षेत्र के साथ ही पूरी रवांई में होती है, जहां भक्त उनके मंदिर में दर्शन, मनौती और जागरण के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

रथ देवता अपने पाशवा पर अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। साथ ही रथ देवता लोगों की समस्याओं का समाधान भी करते हैं। भक्त रथ देवता खुशहाली की कामना करते हैं। जागरण संपन्न होने के प्रसाद वितरण किया जाता है। भक्त रथ देवता के घड्याले का पूरे साल इंतजार करते हैं।

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